Posts

Showing posts from February, 2026

कवि बुद्धिजीवी की अवधारणा और निवेदित की राह

 कवि-बुद्धिजीवी की अवधारणा और नवोदित की राह  भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य को स्वतंत्र आत्माओं का प्रदेश माना गया है। पर भीतर के भुवन और भवन दोनों में प्रवेश करें तो देखते हैं कि वहाँ भी दरबार हैं, कतारें हैं, और अदृश्य प्रवेश-द्वार हैं जिन पर पहरेदार भी खड़े हैं।  भेंड़चाल तंत्र का उदय ऐसे ही माहौल में जन्मता और बढ़ता है। यह कोई नई बात भी नहीं,लेकिन उसका सबसे गहरा असर केवल स्थापित लेखकों तक ही सीमित रहता नहीं, बल्कि उन नवोदितों पर अधिक पड़ता है जो किसी भी विधा यथा कविता, कहानी, आलोचना, नाटक, डिजिटल लेखन आदि के माध्यम से साहित्य में प्रवेश कर रहे होते हैं। और यहीं से ही एक पूरी पीढ़ी की संवेदना का भविष्य प्रभावित होता है। भेड़चाल का तंत्र और नवोदित की पहली सीख अपने निजी अनुभव से कहा रहा हूँ कि कोई भी नया लेखक जब साहित्यिक दुनिया में कदम रखता है, तो वह अपनी रचना के साथ आता है, रणनीति के साथ नहीं। पर भेंड़चाल तंत्र बहुत जल्दी ही उसे कईं हथकंडों से अपना बनाकार उसे निर्देशित करना प्रारंभ कर देता है और अपनी ओढ़ी हुई बड़ी बड़ी मुद्राओं से प्रभावित (स्मरण रहे वे कभी भी प्...